बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा राज्यों के परिवहन विभाग ने वाहनों के उत्सर्जन मानकों (Emission Norms) को बेहद सख्त कर दिया है। आज के समय में पेट्रोल पंपों पर लगे एएनपीआर (ANPR) कैमरे और ट्रैफिक पुलिस के हैंडहेल्ड डिवाइस गाड़ी के नंबर से ही तुरंत जांच लेते हैं कि आपके वाहन का पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (Pollution Under Control Certificate - PUCC) वैध है या एक्सपायर हो चुका है। जिस तरह पेंडिंग चालान से राहत पाने के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत में ट्रैफिक ई-चालान माफी और वाहन दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए डिजिलॉकर पर ड्राइविंग लाइसेंस व आरसी डाउनलोड जरूरी है, उसी तरह अपनी गाड़ी का पीयूसी सर्टिफिकेट समय पर अपडेट रखना आपको 10,000 रुपये के चालान से बचाता है।
1. बिना पीयूसी (PUCC) के गाड़ी चलाने पर जुर्माना और बीमा नियम मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम की धारा 190(2) के तहत बिना वैध पॉल्यूशन सर्टिफिकेट के वाहन चलाने पर कड़े दंड का प्रावधान है:
- 10,000 रुपये तक का भारी चालान: पहली बार बिना वैध पीयूसीसी के पकड़े जाने पर राज्य के नियमों के अनुसार 1,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक का जुर्माना और 3 महीने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित (Suspend) किया जा सकता है। - पेट्रोल पंप पर ऑटोमैटिक चालान: दिल्ली-एनसीआर और प्रमुख महानगरों में पेट्रोल पंपों पर लगे कैमरे गाड़ी में ईंधन भरते समय नंबर प्लेट स्कैन करते हैं और पीयूसी एक्सपायर मिलने पर अपने आप मोबाइल पर ई-चालान भेज देते हैं। - वाहन बीमा रिन्यूअल में अनिवार्यता: सुप्रीम कोर्ट और इरडा (IRDAI) के निर्देशानुसार किसी भी वाहन का मोटर इंश्योरेंस रिन्यू कराते समय वैध पीयूसी सर्टिफिकेट होना जरूरी है।
2. BS3, BS4 और BS6 वाहनों के लिए पीयूसी की वैधता अवधि (Validity Period) वाहन के इंजन और उत्सर्जन मानक के आधार पर पॉल्यूशन सर्टिफिकेट की वैधता इस प्रकार निर्धारित है:
1. बिल्कुल नया वाहन (New Car or Bike): शोरूम से निकलने वाली किसी भी नई गाड़ी के लिए शुरुआती पॉल्यूशन सर्टिफिकेट पूरे 1 वर्ष (12 महीने) के लिए मान्य होता है। 2. BS4 और पुराने मानक वाले वाहन: 1 साल पूरा होने के बाद BS3 और BS4 श्रेणी की कार, बाइक और स्कूटर को हर 6 महीने में पॉल्यूशन जांच करानी होती है। 3. BS6 (भारत स्टेज-6) वाहन: अप्रैल 2020 के बाद रजिस्टर्ड सभी BS6 पेट्रोल, सीएनजी और डीजल वाहनों का उत्सर्जन बेहद कम होने के कारण इनका पीयूसी सर्टिफिकेट एक बार बनने के बाद पूरे 1 वर्ष (12 महीने) तक वैध रहता है। 4. इलेक्ट्रिक वाहन (EV): बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक स्कूटर और इलेक्ट्रिक कारों से शून्य धुआं निकलने के कारण उन्हें पीयूसी सर्टिफिकेट से पूरी तरह छूट प्राप्त है।
3. पॉल्यूशन जांच की सरकारी फीस कितनी है अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्रों (Authorized PUC Testing Centres) पर जांच का शुल्क बेहद मामूली होता है:
- दोपहिया वाहन (Two-Wheeler - बाइक और स्कूटर): 60 रुपये से 80 रुपये। - चार पहिया पेट्रोल/सीएनजी/एलपीजी कार: 80 रुपये से 100 रुपये। - डीजल कार और भारी वाहन: 100 रुपये से 150 रुपये। जांच के दौरान ऑपरेटर वाहन के साइलेंसर में सेंसर लगाकर कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और हाइड्रोकार्बन (HC) के स्तर की जांच करता है और वाहन की नंबर प्लेट की लाइव फोटो वाहन पोर्टल पर अपलोड करके सर्टिफिकेट जारी करता है।
4. परिवहन पोर्टल से ऑनलाइन PUCC स्टेटस चेक और पीडीएफ डाउनलोड कैसे करें यदि आपकी पीयूसी पर्ची खो गई है या आप अपनी गाड़ी के सर्टिफिकेट की एक्सपायरी डेट चेक करना चाहते हैं, तो इन आसान चरणों का पालन करें:
1. सड़क परिवहन मंत्रालय के आधिकारिक पीयूसीसी पोर्टल puc.parivahan.gov.in पर जाएं। 2. ऊपर मेन्यू बार में PUC Certificate विकल्प पर क्लिक करें। 3. यहां अपनी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर (Vehicle Registration Number जैसे PB07XX1234), अपनी आरसी पर लिखे चेसिस नंबर के अंतिम 5 अंक (Last 5 Digits of Chassis Number) और कैप्चा कोड दर्ज करें। 4. PUC Details बटन पर क्लिक करें। स्क्रीन पर आपके वर्तमान पॉल्यूशन सर्टिफिकेट का पूरा विवरण और वैधता तिथि खुल जाएगी। 5. नीचे दिख रहे Print बटन पर क्लिक करके आप अपना आधिकारिक डिजिटल पीयूसी सर्टिफिकेट पीडीएफ फॉर्मेट में डाउनलोड कर सकते हैं, जो ट्रैफिक चेकिंग में पूरी तरह मान्य है।





