खेलो इंडिया Sports Goods Manufacturing Scheme को 28 अक्टूबर को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली है। इसके लिए 2026 से 2033-34 तक ₹1,856.67 करोड़ का प्रावधान है। लक्ष्य भारत में खेल-सामान का निर्माण, निवेश और निर्यात मजबूत करना है।

कंपनियों और छोटे उद्योगों के लिए क्या है?

योजना में विशेष निर्माण क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव है। यहाँ निर्माता, आपूर्तिकर्ता, जाँच सुविधाएँ और डिजाइन केंद्र पास-पास काम कर सकेंगे। मौजूदा छोटे उद्योगों के समूहों को साझा सुविधाओं और ढाँचे में सुधार के जरिए समर्थन देने की भी बात है।

नए निवेश और उत्पादन बढ़ाने से जुड़े दो हिस्सों का संयुक्त प्रावधान ₹1,130 करोड़ है। अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों के गुणवत्ता प्रमाणन को हासिल करने और नवीनीकरण के लिए ₹105 करोड़ रखे गए हैं।

खिलाड़ी को सीधे पैसे मिलेंगे?

यह घोषणा मुख्य रूप से उद्योग और निर्माण से जुड़ी है। इसे व्यक्तिगत खिलाड़ी की छात्रवृत्ति या सीधे नकद भुगतान की योजना न समझें। किसी कंपनी को निश्चित रकम मिलने का दावा भी अभी न करें। घोषणा के साथ आवेदन की अंतिम तारीख या सभी आवेदकों के लिए तय सहायता दर नहीं दी गई है।

कारोबार के लिए अलग-अलग सहायता का फर्क समझना जरूरी है। SME Growth Fund का उद्देश्य इस नई योजना से अलग है।

छोटे कारोबार की उधारी के संदर्भ में मुद्रा तरुण प्लस की पात्रता भी अलग से समझें; ऋण और निर्माण सहायता एक जैसी चीज नहीं हैं।

आगे किन बातों पर नजर रखें?

सरकार ने तकनीक, अनुसंधान, कौशल और बाजार तक पहुँच पर भी जोर दिया है। आप निर्माता हैं तो विस्तृत नियम आने पर पात्रता, स्वीकार्य खर्च, प्रमाणन और आवेदन प्रक्रिया देखें। मंजूरी को अपने कारोबार के लिए स्वीकृत अनुदान न मानें। रोजगार और निर्यात बढ़ना योजना का लक्ष्य है, किसी व्यक्ति के लिए नौकरी का प्रस्ताव नहीं।

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