अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) द्वारा साल 2019 में शुरू की गई 'वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप' (WTC - World Test Championship) ने क्रिकेट के सबसे पुराने और पारंपरिक 5-दिवसीय प्रारूप में नई जान फूंक दी है। पहले द्विपक्षीय टेस्ट सीरीज केवल प्रतिष्ठा के लिए खेली जाती थीं, लेकिन अब हर एक टेस्ट मैच का सीधा असर लॉर्ड्स या ओवल में होने वाले विश्व टेस्ट फाइनल की दौड़ पर पड़ता है। हालांकि कई क्रिकेट प्रशंसकों के मन में अक्सर यह उलझन रहती है कि ज्यादा टेस्ट मैच जीतने के बावजूद कोई टीम अंक तालिका में नीचे क्यों रह जाती है, और यह 'पीसीटी' (PCT) आखिर कैसे निकाला जाता है? जिस तरह भारतीय टीम के लिए संकट के पलों में ऋषभ पंत के ऐतिहासिक टेस्ट शतक और कमबैक ने अहम अंक दिलाए हैं और सीमित ओवरों में फैंस आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी स्क्वॉड और फॉर्मेट पर नजर गड़ाए हैं, उसी तरह डब्ल्यूटीसी के अंक गणित को समझना हर क्रिकेट प्रेमी के लिए बेहद दिलचस्प है。
1. डब्ल्यूटीसी का बुनियादी पॉइंट्स सिस्टम (Points Distribution) पहले सीजन में प्रत्येक सीरीज के कुल अंक समान होते थे, लेकिन नियम सरल करते हुए आईसीसी ने अब प्रत्येक टेस्ट मैच के लिए समान अंक निर्धारित किए हैं:
- एक टेस्ट मैच जीतने पर (Win): 12 अंक (100% पीसीटी) - टेस्ट मैच टाई होने पर (Tie): 6 अंक (50% पीसीटी) - टेस्ट मैच ड्रॉ छूटने पर (Draw): 4 अंक (33.33% पीसीटी) - टेस्ट मैच हारने पर (Loss): 0 अंक (0% पीसीटी) - यानी 2 टेस्ट मैचों की सीरीज में कुल 24 अंक और 5 टेस्ट मैचों की सीरीज (जैसे बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी या एशेज) में कुल 60 अंक दांव पर होते हैं।
2. रैंकिंग कुल अंकों से नहीं, बल्कि पीसीटी (PCT) से क्यों तय होती है? डब्ल्यूटीसी के 2 साल के चक्र में सभी 9 टीमें (भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, श्रीलंका, वेस्टइंडीज और बांग्लादेश) बराबर संख्या में टेस्ट मैच नहीं खेलतीं। उदाहरण के लिए इंग्लैंड 21-22 टेस्ट खेलता है, जबकि दक्षिण अफ्रीका केवल 12 टेस्ट खेलता है।
- पीसीटी का फॉर्मूला: (टीम द्वारा जीते गए कुल अंक ÷ कुल खेले गए मैचों के अधिकतम उपलब्ध अंक) × 100 - आसान उदाहरण: मान लीजिए भारत ने 10 टेस्ट खेले हैं। 10 मैचों के अधिकतम उपलब्ध अंक 120 (10 × 12) हुए। यदि भारत ने 7 मैच जीते (84 अंक) और 1 ड्रॉ खेला (4 अंक), तो भारत के कुल अंक 88 हुए। - भारत का पीसीटी = (88 ÷ 120) × 100 = 73.33% - अंक तालिका में जिस टीम का पीसीटी प्रतिशत सबसे अधिक होता है, वही नंबर 1 और नंबर 2 पर रहकर फाइनल के लिए क्वालिफाई करती है।
3. स्लो ओवर-रेट पेनल्टी: जो टीमों का फाइनल का सपना तोड़ देती है डब्ल्यूटीसी में सबसे सख्त नियम धीमी गति से गेंदबाजी (Slow Over-Rate) को लेकर है:
- नियम: प्रत्येक टीम को एक घंटे में औसतन 15 ओवर फेंकने होते हैं। - पेनल्टी: तय समय में टीम जितने ओवर पीछे रहती है, प्रत्येक शॉर्ट ओवर के लिए टीम के कुल अंकों में से 1 डब्ल्यूटीसी अंक (1 WTC Point per over short) सीधे काट लिया जाता है। - ऐतिहासिक उदाहरण: पिछले चक्र में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीमों ने स्लो ओवर-रेट के कारण एक ही मैच में 8 से 10 अंक तक गंवाए हैं, जिससे उनका पीसीटी अचानक गिर गया।




