दीवाली की तैयारी में इस बार एक छोटा बदलाव कर सकते हैं: खरीदारी की लिस्ट बनाने से पहले घर में रखी सजावट देख लें। कितनी लाइटें ठीक हैं, कितने दीये फिर इस्तेमाल हो सकते हैं और किस चीज की सच में जरूरत है? नई Green Diwali मुहिम को घर की ऐसी व्यावहारिक तैयारी से जोड़ना आसान है।
पर्यावरण मंत्रालय की 20 अक्टूबर 2026 की सूचना के मुताबिक WWF-India के EIACP कार्यक्रम केंद्र ने 20 अक्टूबर से 8 नवंबर तक देशव्यापी अभियान शुरू किया है। इसमें पटाखों से दूर रहने, स्थानीय सामान चुनने और कम कचरे वाला त्योहार मनाने की अपील है।
नई मुहिम में क्या कहा गया है?
सूचना में परिवारों, स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक समूहों को भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसमें दीये और ऊर्जा बचाने वाली लाइटें, एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक से बचाव तथा कचरा अलग रखने जैसे कदम शामिल हैं।
भाग लेने वाले समूह अपनी गतिविधि की जानकारी आधिकारिक घोषणा में दिए फॉर्म से भेज सकते हैं। चुनी गई गतिविधियां EIACP की वेबसाइट या सोशल मीडिया पर दिखाई जा सकती हैं। यह हर प्रविष्टि को प्रमाणपत्र, पुरस्कार या प्रचार मिलने का वादा नहीं है।
क्या यह नया पटाखा प्रतिबंध है?
अभियान की अपील और स्थानीय कानूनी आदेश अलग बातें हैं। इस प्रेस रिलीज को अपने शहर में बिक्री, इस्तेमाल या समय-सीमा से जुड़े किसी खास नए प्रतिबंध का आदेश न समझें। ऐसी जानकारी के लिए स्थानीय प्रशासन की वर्तमान सूचना देखें।
किसी दूसरे शहर का पोस्टर अपने मोहल्ले के नियम की तरह आगे न भेजें। तारीख और जारी करने वाली संस्था देखकर ही जानकारी साझा करें। खासकर पुरानी दिवाली की सूचना फिर घूम रही हो तो उसका साल जरूर मिलाएं।
पहले खरीदारी की छोटी सूची बनाएं
कागज पर तीन हिस्से बनाएं: घर में मौजूद सामान, मरम्मत या सफाई से काम आने वाला सामान और नया खरीदने वाला सामान। परिवार के दो लोग अलग-अलग खरीदारी करते हैं तो दोनों एक ही सूची देखें।
कई बार अतिरिक्त लाइट या सजावट केवल इसलिए आ जाती है क्योंकि पिछले साल का सामान कहां रखा है, याद नहीं रहता। पहले डिब्बे खोलकर देखने में लगा थोड़ा समय दोबारा खरीदारी से बचा सकता है। हर पुरानी चीज इस्तेमाल लायक हो, यह मानकर भी न चलें।
टूटी या खराब बिजली की सजावट के लिए योग्य मरम्मत करने वाले की मदद लें। कटे तार पर अस्थायी जुगाड़ करके उसे फिर लगाने की जल्दबाजी न करें। सुरक्षित उपयोग को कम खर्च करने की इच्छा से ऊपर रखें।
सजावट में एक जगह का चुनाव करें
पूरे घर के हर कोने के लिए नई चीज खरीदने के बजाय प्रवेश द्वार या बैठने की जगह जैसी एक मुख्य जगह चुन सकते हैं। रंग, दीये और उपलब्ध सजावट का मेल सोच लें। कम सामान में व्यवस्थित सजावट भी अच्छी लग सकती है।
फूल या दूसरी सामग्री लेते समय पूछें कि कार्यक्रम के बाद उसे कैसे हटाएंगे। सजावट लगाने वाले और सफाई करने वाले अलग लोग हों तो यह बात पहले तय करें। त्योहार का आखिरी काम सिर्फ लाइट बंद करना नहीं, जगह वापस ठीक करना भी है।
दीये या मोमबत्ती के लिए स्थिर और उपयुक्त जगह रखें। पर्दे, कागज और भीड़भाड़ वाली आवाजाही से दूरी का ध्यान दें। छोटे बच्चों के साथ सजावट बनाते समय किसी जिम्मेदार बड़े को मौजूद रखें।
लाइटों का समय तय करना आसान कदम है
किस समय सजावट चालू होगी और कौन बंद करेगा, परिवार या सोसायटी में पहले तय करें। हर व्यक्ति यह मान ले कि दूसरा बंद कर देगा तो लाइटें जरूरत से ज्यादा देर चल सकती हैं।
ऊर्जा की बचत का कोई मनमाना प्रतिशत मानने की जरूरत नहीं। पहले अपनी वास्तविक आदत पहचानें। जिस जगह रोशनी की जरूरत नहीं है, वहां अतिरिक्त सजावट लगाने का फैसला टाल सकते हैं। खरीदते समय उत्पाद की सही जानकारी और उपयोग के निर्देश पढ़ें।
साझा जगह में तारों से आने-जाने का रास्ता न रोकें। बुजुर्गों, बच्चों और चलने में सहायता लेने वाले लोगों के लिए रास्ता साफ रखना सजावट का ही हिस्सा है। तस्वीर में अच्छा दिखना ही एकमात्र कसौटी नहीं होनी चाहिए।
उपहार में पैकिंग से पहले उपयोग देखें
ऐसा उपहार चुनने की कोशिश करें जिसे सामने वाला इस्तेमाल कर सके। सुंदर डिब्बे के अंदर जरूरत से ज्यादा छोटे पैकेट हों तो बाद में संभालने और कचरा अलग करने का काम बढ़ता है। दुकानदार से पैकिंग के विकल्प पूछ सकते हैं।
घर में साफ और सही हालत के बैग या डिब्बे हैं तो उन्हें फिर इस्तेमाल करने का विचार रखें। लेकिन खाने की चीज के लिए उपयुक्त और स्वच्छ पैकिंग ही चुनें। केवल पुराना होने से कोई पैकेट हर उपयोग के लिए सही नहीं बन जाता।
काल्पनिक उदाहरण लें: एक सोसायटी हर परिवार को अलग सजावटी प्लास्टिक की चीज देने के बजाय उपयोगी स्थानीय उत्पाद चुनती है। इसमें पहले बजट, गुणवत्ता और लोगों की जरूरत पर बात हो सकती है। यह किसी अभियान की अनिवार्य शर्त नहीं, निर्णय लेने का तरीका है।
स्थानीय खरीदारी में कौन से सवाल पूछें?
दीये, कपड़े, हस्तशिल्प या सजावट खरीदते समय सामग्री, आकार, कुल कीमत और डिलीवरी का समय पूछें। ‘हाथ से बना’ होने पर भी फोटो और मिलने वाले सामान के बारे में स्पष्ट जानकारी जरूरी है।
छोटे विक्रेता से बड़ी संख्या में सामान लेना हो तो नमूना देखकर समय दें। आखिरी समय का ऑर्डर और पहले से तय ऑर्डर उसकी तैयारी में अलग असर डाल सकते हैं। तय तारीख की पुष्टि लिखित संदेश में रखना दोनों के काम आता है।
आप खुद घर से ऐसी चीजें बेचते हैं तो WhatsApp Business पर ऑर्डर और खर्च संभालने की गाइड पढ़ सकते हैं। ग्राहक को सही तस्वीर और साफ डिलीवरी जानकारी देना त्योहार की जल्दबाजी में भी जरूरी है।
स्कूल इसे केवल भाषण तक सीमित न रखें
बच्चों को एक महंगी नई चीज लाने की शर्त देने के बजाय घर में उपलब्ध सामग्री पर चर्चा कराई जा सकती है। शिक्षक पहले गतिविधि का उद्देश्य और जरूरी सामग्री बता दें। भागीदारी को परिवार की खरीदने की क्षमता से न जोड़ें।
एक कक्षा अपनी खरीदारी की सूची का अभ्यास कर सकती है। बच्चे लिखें कि कौन सा सामान फिर इस्तेमाल होगा और कार्यक्रम के बाद क्या बचेगा। इससे अभियान रोजमर्रा के फैसले से जुड़ता है।
फोटो भेजने या सार्वजनिक करने से पहले संस्था की सहमति प्रक्रिया और बच्चों की निजता का ध्यान रखें। किसी परिवार की निजी जानकारी को अच्छे कार्यक्रम का प्रमाण बनाने की जरूरत नहीं। गतिविधि में सच में जितने लोग शामिल हुए, उतनी ही संख्या लिखें।
सोसायटी में जिम्मेदारी कैसे बांटें?
एक व्यक्ति खरीदारी, दूसरा सजावट और तीसरा सफाई की व्यवस्था देख सकता है। लेकिन जिम्मेदारी बांटने से पहले सभी को कुल योजना समझ आनी चाहिए। सामान रखने और कार्यक्रम खत्म होने पर हटाने का समय भी तय करें।
कचरे के लिए अलग व्यवस्था रखते हैं तो उस पर साफ पहचान और उसे संभालने वाले व्यक्ति की जानकारी दें। स्थानीय कचरा संग्रह की व्यवस्था के मुताबिक आगे देना जरूरी है। केवल अलग डिब्बे रखने के बाद सब फिर मिला देने से मकसद अधूरा रह जाता है।
नए विकल्प पर असहमति हो तो लोगों को शर्मिंदा करने के बजाय छोटा व्यावहारिक बदलाव चुनें। पहले साझा जगह की पैकिंग कम करने या समय पर लाइट बंद करने जैसी बात पर सहमति बन सकती है।
ऑनलाइन ऑफर देखते समय जल्दबाजी न करें
दीवाली के नाम पर बड़ा ऑफर दिखे तो कुल कीमत, डिलीवरी और वापसी की शर्त पढ़ें। सजावट का आकार फोटो से बड़ा या छोटा समझ में आ सकता है। माप देखकर खरीदना बेहतर है।
सामान आने पर गलत या टूटा हो तो ऑर्डर और प्राप्ति का रिकॉर्ड रखें। आगे की प्रक्रिया समझने के लिए ऑनलाइन खरीदारी के रिफंड और उपभोक्ता शिकायत की गाइड देख सकते हैं। खरीदारी की समस्या को अभियान से जुड़ा सरकारी भुगतान न समझें।
त्योहार के बाद दस मिनट की समीक्षा
कौन सा सामान अगली बार काम आएगा, उसे साफ और सुरक्षित जगह रखें। डिब्बे के बाहर छोटा नाम लिखने से अगले साल ढूंढना आसान हो सकता है। जो चीज खराब निकली, उसका अलग नोट रखें।
पूरे परिवार से एक सवाल पूछें: कौन सा बदलाव बिना परेशानी के हो गया? अगले साल की शुरुआत उसी से हो सकती है। अभियान की तारीख खत्म होने के बाद भी सोच-समझकर खरीदने और सामान संभालने की आदत काम आती है।
फोटो 15 नवंबर 2020 की सजावट का है, अक्टूबर 2026 के अभियान के किसी कार्यक्रम का नहीं। फोटो: Praful Kharade; इसे क्रॉप और आकार बदलकर 1536×864 WebP बनाया गया है। मूल और यह संस्करण CC BY-SA 4.0 के तहत हैं; स्रोत और लाइसेंस नीचे हैं।
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